घरेलू स्तर पर प्रसंस्करण व लघु उद्योग स्थापित करने की व्यावहारिक रणनीतियों साझा किए गये विचार
प्रशिक्षण ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार एवं आय सृजन के लिए प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल
प्रशिक्षण कोर्स कोआर्डिनेटर/गृह विज्ञान वैज्ञानिक डॉ अंजलि वर्मा ने प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मौसमी फल-सब्जियों एवं गन्ना आधारित उत्पादों के वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण, पोषण संरक्षण, गुणवत्ता मानकीकरण, लागत-लाभ विश्लेषण पर विस्तृत एवं सजीव प्रशिक्षण प्रदान किया। उनके मार्गदर्शन में प्रशिक्षण को पूर्णतः हस्त-प्रयोग आधारित, सहभागी एवं रोजगारोन्मुख बनाया गया, जिससे प्रतिभागियों में आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास एवं उद्यमशील सोच का विकास हुआ। डॉ. वर्मा ने विशेष रूप से घरेलू एवं बेरोजगार महिलाओं को यह जानकारी दी कि वे अपने खाली समय का सदुपयोग करते हुए, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के माध्यम से सामूहिक रूप से कार्य कर, कम पूंजी में घर से ही मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार कर सकती हैं और नियमित आय अर्जित कर सकती हैं। उन्होंने स्वच्छता, खाद्य सुरक्षा मानकों, पैकेजिंग, लेबलिंग तथा बाजारोन्मुख उत्पाद विकास पर भी विशेष बल दिया।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों द्वारा आंवला अचार, आंवला कैंडी, कांजी, मुरब्बा, मिक्स नवरंग अचार, चटनी, सिरका एवं टमाटर सॉस जैसे मूल्य संवर्धित उत्पाद सफलतापूर्वक तैयार किए गए, जिन्हें भविष्य में स्वरोजगार एवं आय सृजन के सशक्त माध्यम के रूप में अपनाया जा सकता है। केंद्र के पौध सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ प्रेम शंकर ने फल- सब्जियों एवं प्रसंस्कृत उत्पादों में कीट एवं रोग नियंत्रण, स्वच्छता मानकों तथा सुरक्षित भंडारण प्रबंधन पर उपयोगी जानकारी साझा की।
केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. वी. बी. सिंह ने मौसमी फल एवं सब्जियों की उन्नत प्रजातियों, गुणवत्तायुक्त कच्चे माल के चयन तथा उच्च उत्पादकता से संबंधित वैज्ञानिक जानकारी दी। (कृषि प्रसार वैज्ञानिक) आर. वी. सिंह ने मूल्य संवर्धन आधारित उद्यमिता विकास, स्वयं सहायता समूहों की भूमिका, विपणन संभावनाओं एवं सरकारी योजनाओं के माध्यम से स्वरोजगार के अवसरों पर प्रकाश डाला। डॉ हरिओम मिश्रा (शस्य वैज्ञानिक) ने खाद्य प्रसंस्करण में प्रयुक्त लघु यंत्रों, उपकरणों, ऊर्जा-दक्ष तकनीकों तथा सुरक्षित एवं किफायती प्रसंस्करण विधियों पर व्यावहारिक व्याख्यान प्रस्तुत किया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 25 महिला प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता की। यह प्रशिक्षण ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार एवं आय सृजन के लिए प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
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